बचपन से आज तक समाज का भय कुछ इस कदर चढ़ा था कि अपनी जानशीन को कुछ कह ना सके। आंखो में उसके भी प्यार था हमे पर समाज के बंधनों और घर के सम्मान ने बांध रखा था। कल उसका गौना हो गया और अपनी मोहब्बत का हाथ किसी और के हाथो में देख एक क्षण को बिखर सा गया वो। और फिर उसने कहा:-
दशक का उभरता हुए शायर राहुल देव।
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कोई भी परेशानी हो तो बताने कि कृपा करें। नमस्कार।।