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Saturday, November 07, 2020

BIHAR ELECTION EXIT POLL हो गया खुलासा इसकी बन रही है सरकार।।

Bihar election।। Exit poll।। 
 बिहार मे बनेगी किसकी  सरकार 

    तिसरे चरन का चुनाव सम्पन्न होते हि बिहार मे अटकलों  कि दौर कि शुरुआत हो गयी है ।  यद्यपि मतदाताओ ने सभी बिहार चलानेवाले का भाग्य EVM  में कैद हो गया है लेकिन ओपिनियन पोल की शुरुआत हो गयी है| तो आइये हम भी आपके लिए ले कर आये हैं बिहार विधान सभा चुनाव का ओपिनियन पोल | 

Bihar election।। Exit poll
लेकिन ओपिनियन पोल जानने पहले जरा सीटों  के गणित को  जान लेते हैं :-

बिहार में कुल 243 विधानसभा की सीटें हैं और दो मुख्य गठबंधन NDA  और महागठबंधन हैं | राष्ट्रीय गणतांत्रिक गठबंधन की बात करें तो भाजपा के साथ जदयू , हम, वीआईएपी है |  जहाँ  जदयू 122  सीटों पर चुनाव लड़ रही है तो भाजपा कुल 121 सीटों पर चुनाव लड़ रही है | जहाँ  जदयू ने अपने  हम को 7  सीटें  दी है तो भाजपा ने VIP  को अपने खाते से 11  सीटें  प्रदान कर दी |  गौर करने वाली बात है की VIP  अर्थात  मुकेश साहनी के पार्टी से भाजपा के कार्यकर्ता ही चुनाव लड़ रहे हैं |  वहीँ लोजपा ने भी  संघ और भाजपा के अधिक कार्यकर्ताओ को टिकट दिया है | जहा लोजपा भाजपा को फायदा पहुंचाने की बात कर रहा था और भाजपा के कार्यकर्ता भी लोजपा के इस स्टंट से खुश थे वही अब  आशंकित हैं की कही ऐसा न हो की  लोजपा  के चक्कर में भाजपा और जदयू की सरकार ही न बन पाए | 


वही महागठबंधन की बात करें  तो सबसे बड़ी पार्टी राजद  144  सीटों पर, कांग्रेस 70  और वाम दल 29 सीटों पर अपना दम दिखा रही है | NDA  की तरह महागठबंधन बिलकुल भी उलझी हुई नहीं है, महागठबंधन पुरे साफ़ विचार के साथ चुनाव में  उतरी थी |  और अब तीसरे चरण के ख़तम होते होते नितीश कुमार समेत सबको लगने लगा  है की महागठबंधन चुनाव जीत रही है | 

आखिर ऐसा हुआ कैसे ? सबके  मन में यही प्रश्न है | भाजपा 110 सीटों पर चुनाव लड़ रही है जहा उसक सीधा मुकाबला राजद से है  यहाँ तक कुछ दिक्कत नहीं है दोनों का अपना अपना कैडर है , कुछ गुस्साए और कुछ बागी है | लेकिन लोजपा के गेम में घुसते ही सारा का सारा गणित बदल जाता है |  जहा लोजपा  हर सीट सीट पर  जदयू   को कमजोर कर रही  अप्रत्यक्ष रूप से राजद को फायदा पंहुचा रहा है|  वही बिहार की राजनीति में रोजगार के  नाम पर घुसने वाली  पुष्पम प्रिया  भी भाजपा को क्षतिग्रस्त  करने की संभावना रखती है लेकिन बहुत ही कम सीटों पर। 

ओपिनियन पोल और एग्जिट पोल में बहुत ज्यादा अंतर होता हुआ नहीं दिख रहा। जीत की बात करे तो जहां 

Bihar election ।। Exit poll

भाजपा  60- 70 सीटे जीत रही है तो
जदयू को 30- 40 सीट मुश्किल से मिलेंगी।

लोजपा 7- 10 सीटों पर सिमट कर रह जाएगी।

वहीं अगर महागठबंधन की बात करे तो 
राजद को  90 -100 या अधिक सीट मिलने की प्रबल संभावना है और इस विधानसभा चुनाव में वो प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरेगी।

कांग्रेस को 40 - 50 सीट और 
वामदलों को भी 8 -10 सीट मिलने की संभावना रहेगी।

अन्य 5-7 सीट ला सकती है।

तो कुल मिलाकर कहा जाए तो महागठबंधन की सरकार बनती हुई दिख रही है। आशा करते हैं कि आने वाली सरकार युवाओं के रोजगार और बेहतर भविष्य के लिए काम करेगी।

Exit पोल इस तरह है

बीजेपी -60 - 70
जदयू - 30 - 40

राजद - 90 -100
कांग्रेस - 40-50
वामदल - 7 - 10









Saturday, October 31, 2020

फ़्रांस की लड़ाई आपकी अपनी लड़ाई है।

फ्रांस को उसके लड़ाई में सपोर्ट करे और अपने देश कि रक्षा करें क्युकी ये सिर्फ उनकी नहीं आपकी भी लड़ाई है।


 श्रीलंका के बाद जिस तरह से फ्रांस इस्लामिक कट्टरता का पैर अपने सरजमीं से उखाड़ रहा है वो दुनिया में शांति का मार्ग प्रशस्त करेगा। फ्रांस एक बार फिर दुनिया का अगुवा बन कर खड़ा है और दुनिया पीछे से उसे समर्थन कर रही है। विश्व के इस्लामिक देशों को छोड़ दे तो लगभग सभी देश इस्लामिक आतंकवाद और कुरान के गलत व्याख्यान से परेशान है। यद्यपि मैंने आज तक कुरान पढ़ा नहीं है लेकिन मै दावे के साथ बोल सकता है कि कुरान को गलत व्याख्या कर लोगो को बरगलाया और भटकाया जा रहा है। वरना कोई भी धर्म बेगुनाहों को मारना नहीं सिखाता। दुनिया चाहती तो इसे आरम्भ में ही रोक सकती थी लेकिन  महातीर मोहम्मद जैसे  लोग सबको उसका कर जबरन आतंक फैलाने की साज़िश रचते हैं। इन जैसे लोगो को पर्दे के पीछे से खेलना पसंद होता है। लेकिन इस बार उम्र ने भी धोका दे दिया और किसी आतंकी समूह के मुखिया के तरह महातिर ने धड़ाधड़ 13 ट्वीट कर डाले। जिसमे से एक ट्वीट था ' मुसलमानों को लाखो फ्रांसिसी को मारने और गुस्सा करने का अधिकार है। ''
इसके बाद ट्विटर ने खुद संज्ञान लेते हुए महातिर के इस ट्वीट को हटा दिया लेकिन बात यही थमती नजर नहीं आ रही। लोगो की मांग है कि महातिर के अकाउंट को भी सस्पेंड किया जाए। वैसे आइए जानने की कोशिश करते है इस्लामिक एस्टेट  और उसके पैरोकारों की क्रोनॉलजी को।

फ्रांस की लड़ाई आपकी अपनी लड़ाई है।

 जब जब कोई बॉम्ब धमाका होता है तब तब विरले ही आपने किसी महातिर को उसकी निंदा करते हुए देखा होगा लेकिन जब भी किसी आतंकवादी को कोई देश सजा देता है तो इन जैसे लोग बखेड़ा खड़ा कर देते हैं। इसी तरह का गैंग भारत में अलग अलग जगह अलग अलग भेष में खड़ा है। कहीं जामिया मिलिया का स्टूडेंट बन के तो कहीं जेएनयू का प्रोफेसर बन के, कहीं वामपंथियों का कॉमरेड बन के तो कहीं टुकड़े टुकड़े गैंग बन के। आपको पुलवामा हमला याद है? नहीं याद है तो फिर याद कीजिए। और बताइए की कितने वामपंथियों या टुकड़े टुकड़े गैंग के लोगो ने आतंकवादियों कि निंदा की थी नहीं किसी ने नहीं । लेकिन यही गैंग आज कॉलेज कैंपस में फ्रांस का विरोध कर रहा है। ये फ्रांस का विरोध इसलिए नहीं कर रहे क्युकी इन्हे फ्रांस से वह के कानून से मतलब है बल्कि ये पाकिस्तान के कबूलनामें को ढकने के लिए व्यर्थ का नाटक पसार रहे हैं। ताकि भारतीयों का ध्यान पाकिस्तान के पुलवामा कबूलनामें पर से हट जाए और फ्रांस पर टिक जाए। ये पाकिस्तान को बचाने की साज़िश है जो भारत में रह रहे गद्दार कर रहे हैं। 

  दुनिया के किसी इस्लामिक देश ने फ्रांस में शिक्षक के हत्या  किए जाने पर आतंकवाद कि निंदा नहीं की थी लेकिन फ्रांस के द्वारा उठाए गए कदम पर जोर जोर से भौंकने लगे। यही कारण है कि आतंकवादी अपने पीछे से हो रहे समर्थन के कारण और ज्यादा हत्याएं और आतंक फैलाते हैं। पहले तो अमेरिका के व्यपारवाद ने  आतंकियों को हथियार मुहैया कराए फिर जब उसी के सांप ने उसे डसना शुरू कर दिया तो वो आतंक के खात्मे के लिए बाजार में उतर पड़ा। खूब हथियार भेजे, सैनिक भेजे, सैनिकों की कुर्बानी दी लेकिन नतीजा क्या निकला ढाक के तीन पात। चरमपंथी अपना क्षेत्र विस्तार करते गए । युवाओं को बहला फुसलाकर जोडते गए और अब दुनिया के सामने चरमपंथ ऐसा संकट आ खड़ा हुआ है कि उसे रोकना मुश्किल है। म्यांमार को है ले लीजिए। पहले तो उसने शरणार्थियों को शरण दिया। लेकिन जब शरणार्थी ही आतंकवादी बन गए तो वहां के सरकार और फौज ने उन्हें खदेड़ बाहर किया। बौद्ध जो की शांति के प्रतीक माने जाते हैं उन्हें भी हथियार उठाने को मजबूर कर दिया गया। अगर आप ब्रिटेन के संसदीय व्यवस्था को गौर से देखेंगे तो आपको दिखेगा की हर डिसीजन मेकिंग में इस्लाम का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। ये लोग एक पैटर्न पर काम करते हैं। 18 वीं शताब्दी में ये फौज लेकर कहीं घुसते थे और वहां अपनी जनसंख्या बढ़ाकर वाह सालो तक शासन करते थे। लेकिन अब वो तरीका बदल गया। अब ये शरणार्थी बनकर किसी देश में घुसते हैं वहां अपनी जनसंख्या बढ़ते हैं और फिर वहां पॉलिसी मेकिंग से लेकर डिसीजन तक को प्रभावित करते हैं। जैसा कि आपने भारत में भी देखा होगा इनका वोट एकमुश्त पड़ता है और अगर ये एक बार 30 प्रतिशत के आस पास पहुंच जाते हैं तो फिर किसी भी देश में ये अपनी सरकार बना लेते हैं और वह के सारे नियम कानून इनके हिसाब से चलता है।  अगर ये 50% या उसके आसपास भी पहुंच गए तो फिर उस देश को इस्लामिक देश बनने से कोई नहीं रोक सकता। 

 इसीलिए जरूरत है आज समय कि मांग भी है कि अगर आप अपने धर्म अपने समुदाय को ऐसे ही देखना चाहते हैं। नहीं चाहते कि भारत का हिन्दू भी पाकिस्तानी हिन्दू की तरह कराहे। अगर आप अपने बाल बच्चों को हिन्दू ही देखना चाहते हैं तो  आज सही समय है जनसंख्या नियंत्रण कानून पास करे। और बढ़ती जनसंख्या पर अविलंब अंकुश लगा कर अपने देश को फ्रांस ना बनने दे। नहीं तो फिर कोई व्यक्ति कुछ भी बोलेगा और अपने घर में ही हलाल कर दिया जाएगा, फिर कोई दिल्ली के शाहिंबाग से भारत को चिकेन्नेक से तोड़ने कि शाजिश रचेगा, फिर कोई  पंडित अपने है घर से भगा दिया जाएगा और  आप देखते ही रह जाएंगे और आपका देश इस्लामिक राष्ट्र बन जाएगा। तो आइए आगे बढ़िए और फ्रांस का समर्थन कीजिए । सड़कों पर उतर कर नहीं बल्कि डिजिटल माध्यम से। भारत के तरफ से ट्रेंड कराए #wesupportfrance।   वैसे भारत सरकार और अन्य सभी देशों को फ्रांस का समर्थन करने के लिए साधुवाद।


Wednesday, October 21, 2020

कैबिनेट ने भारत और नाइजीरिया के बीच शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बाहरी अंतरिक्ष की खोज और इसके उपयोग में सहयोग पर हुए समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बाहरी अंतरिक्ष की खोज और इसके उपयोग में सहयोग पर भारत और नाइजीरिया के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) से अवगत कराया गया। एमओयू पर जून, 2020 में बेंगलुरु में भारत के भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और अगस्त 13, 2020 को अबूजा में नाइजीरिया के राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान और विकास एजेंसी (एनएएसआरडीए) ने हस्ताक्षर किए हैं। • यह समझौता ज्ञापन दोनों देशों को सहयोग के संभावित हित क्षेत्रों जैसे पृथ्वी की सुदूर संवेदन (रिमोट सेंसिंग); सैटलाइट संचार और सैटलाइट आधारित नेविगेशन; अंतरिक्ष विज्ञान एवं ग्रहों की खोज; अंतरिक्ष यान, लॉन्च व्हीकल, अंतरिक्ष प्रणालियों और जमीनी प्रणालियों का उपयोग; भू-स्थानिक उपकरण और तकनीक सहित अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक अनुप्रयोग; और सहयोग के अन्य क्षेत्रों को तय करने के लिए सक्षम बनाएगा। • इस समझौता ज्ञापन के तहत एक संयुक्त कार्य दल का गठन किया जायेगा, जिसमें डीओएस / इसरो और नाइजीरिया के राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान और विकास एजेंसी (एनएएसआरडीए) के सदस्य शामिल होंगे। संयुक्त कार्य दल समय-सीमा और कार्यान्वयन के साधनों सहित कार्य योजना को अंतिम रूप देगा। हस्ताक्षरित एमओयू के तहत एक संयुक्त कार्य दल का गठन किया जायेगा, जिसमें अंतरिक्ष विभाग (डीओएस) / इसरो और नाइजीरिया के राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान और विकास एजेंसी (एनएएसआरडीए) के सदस्य शामिल होंगे। संयुक्त कार्य दल समय-सीमा और कार्यान्वयन के साधनों सहित कार्य योजना को अंतिम रूप देगा। हस्ताक्षरित एमओयू पृथ्वी की सुदूर संवेदन (रिमोट सेंसिंग); सैटलाइट संचार; सैटलाइट नेविगेशन; अंतरिक्ष विज्ञान और बाहरी अंतरिक्ष की खोज के क्षेत्र में नई अनुसंधान गतिविधियों और अनुप्रयोग संभावनाओं का पता लगाने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करेगा। हस्ताक्षरकर्ताओं का विचार है कि पारस्परिक रूप से तय किए गए कार्यक्रम सहयोग के आधार पर पूरे किए जाएंगे। इस तरह की गतिविधियों के लिए फंडिंग की व्यवस्था प्रति कार्य के आधार पर हस्ताक्षरकर्ताओं द्वारा पारस्परिक रूप से तय की जाएगी। इस समझौता ज्ञापन के तहत की जाने वाली संयुक्त गतिविधियों का वित्तपोषण, संबंधित हस्ताक्षरकर्ताओं के कानूनों और विनियमों के अनुसार किया जाएगा और यह इन उद्देश्यों के लिए आवंटित धन की उपलब्धता के अधीन होगा। इस समझौता ज्ञापन के माध्यम से नाइजीरिया सरकार के साथ सहयोग और मानवता के लाभ के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोग के क्षेत्र में एक संयुक्त गतिविधि विकसित करने में सहायता मिलेगी। इस प्रकार, देश के सभी वर्गों और क्षेत्रों को लाभ मिलेगा। भारत और नाइजीरिया लगभग एक दशक से औपचारिक अंतरिक्ष सहयोग करने के लिए प्रयासरत हैं। नाइजीरिया में भारतीय उच्चायोग की पहल के साथ, अंतरिक्ष सहयोग के लिए अंतर-सरकारी एमओयू का मसौदा एमईए के माध्यम से नाइजीरियाई अधिकारियों के साथ साझा किया गया था। राजनयिक माध्यमों से विचार-विमर्श के बाद, दोनों पक्षों ने समझौता ज्ञापन के एक व्यावहारिक मसौदा तैयार किया और आंतरिक अनुमोदन के लिए इसे आगे बढ़ाया। हालांकि एमओयू पर हस्ताक्षर करने की मंजूरी समय से मिल गई थी, लेकिन इस एमओयू पर हस्ताक्षर करने के लिए उचित अवसर नहीं मिल पाया था, क्योंकि 2019 के अंत और 2020 की शुरुआत में कोविड -19 महामारी के कारण कुछ यात्राओं को रद्द पड़ा था।

पैसो के लिए कुछ भी करेगी मैथिली?

अगर आपको पैसा और प्रतिष्ठा दोनों में से कुछ एक चुनने के लिए दिया जाए तो आप क्या चुनेंगे?         


    मैथिली ठाकुर जिसको राइजिंग स्टार जितवाने के लिए मिथिलांचल के लोगो ने ना जाने क्या क्या किया उसी मिथिलांचल का   अपमान कर मैथिली और उसके पिता ये साबित कर रहे हैं कि वो पैसे के लिए कुछ भी कर सकते हैं।


               पहले सौराठ सभा पर भद्दा कॉमेंट कर के उसे लड़कों का हर बताने वाली मैथिली ने इस बार ' मिथिला में ई छै ' गाना गा कर विवाद को जन्म दे दिया है। मैथिली ठाकुर खुद दिल्ली में रहती हैं और लोगो को बता रही है कि मिथिला में सब कुछ है। जिसको मिथिलांचल से तनिक भी कोई मतलब नहीं है और ना ही मिथिलांचल के बारे में तनिक भी जानकारी है आज वो मैठिलो को ये बता रही है कि मिथिलांचल में सब कुछ है। अगर ऐसा ही है मैथिली तो अपने पिताजी से कभी पूछना की वो गांव छोड़ दिल्ली क्यू भागे थे।  पैसों के लालच और अज्ञानता मनुष्य को कहा से कहा तक ले जाता है उसका एक उदाहरण आप यह भी देख सकते हैं। एक समय में जिस गायिका के लिए पूरा मिथिलांचल एक जुट होकर वोटिंग करता था उसी का असलियत सामने आने पर आज पूरा मिथिलांचल उसे गाली दे रहा है।

     आपको बता दे की मैथिली ठाकुर का असली विरोध तब शुरू हुआ था जब विद्यापति समारोह में बुलाए जाने पर इन्होंने पैसे की डिमांड की थी।



      अब आप ही बताइए ऐसे लालची लोगो के साथ मिथिलांचल को क्या करना चाहिए।

Tuesday, October 20, 2020

आपका मन और दिमाग कैसे काम करता है

हमने पिछले भाग में चर्चा किया था कि अमीर या सफल व्यापारी कैसे बने अगर आपने अभी तक वो नहीं पढ़ा तो पहले वो पढ़े। 



आइए आज हम जानते है किसी भी सफल व्यक्ति या बिजनेसमैन के  सबसे बड़े गूढ़ रहस्य के बारे में। जिसके बारे में कई भारतीय और विदेशी विद्वानों ने अपने अपने किताब में लिखा है। यद्यपि उन सब ने अलग अलग तरीकों से इसका विवरण किया है लेकिन अगर सार देखा जाए तो वह सबका एक जैसा ही है।  अगर आपने कभी सदगुरु जग्गी वासुदेव या स्वामी विवेकानंद को अध्ययन किया हो तो उनका भी एक ही मत था कि व्यक्ति सबसे ज्यादा मजबूत या कमजोर अपने मन के कारण होता है।  और हमारा मन वहीं करता है जो हम उसे बताते हैं। अगर आप कमजोर है तो स्वाभाविक रूप से आपने अपने मस्तिष्क को बार बार अपने या अपने किसी परिचित द्वारा इसका अनुभव कराया होगा। अगर आप अपने मस्तिष्क में दिन में दस बार सोचे कि मै बीमार हूं तो 98% chance है कि आप बीमार पर जाएंगे।। आपने will power के बारे में तो अवश्य सुना होगा! क्या आप जानते हैं कि will power क्या होता है?  आपके will power का निर्माण आपका दिमाग करता है ना कि आपका शरीर। आप अपने दिमाग के जरिए जो खाएंगे, आपके शरीर पर उसका वैसा ही असर होगा।  आपका दिमाग आपके शरीर और मन को आपके द्वारा दिए गए इनपुट के द्वारा संचालित करता है और आप आज समाज में जैसे भी हैं अच्छे - बुरे, ऊर्जावान - आलसी सब आप के सोच के कारण ही है। 

                आपने भी अपने अगल बगल में सुना होगा की कोई आदमी बहुत आलसी होता है लेकिन किसी दिन किसी व्यक्ति ने उसकी बेज्जती कर दी और फिर वो  आदमी बदल गया!  आखिर ये कैसे होता है? चलिए आज हम आपको इसके बारे में बताते हैं।


     आपके पास दिमाग है मन है शरीर है। दिमाग इनपुट लेता है और मन तर्क वितर्क करता है फिर शरीर उसका आउटपुट  काम करके देता है। क्या आप जानते हैं आपके पास दो तरह का मन है एक तर्क वितर्क करने वाला में जिसे हम चेतन मन कहते हैं, क्युकी इसमें चेतना होती है। यह किसी भी चीज पर विचार करता है ,सही गलत का फैसला लेता है , आगे पीछे ऊपर नीचे सब सोचता है तब जा कर कार्य करता है, लेकिन इसका कार्य तात्कालिक होता है। जैसे अभी आप पढ़ रहे हैं आपका मन मोबाइल पर व्हाट्सएप चलाने का हुआ। आपके मन में एक उथल पुथल मचेगी। पढू या व्हाट्सएप चलाऊ? अंत आप सोच भारी मन से व्हाट्सएप चलाने लगते हैं। आपका तार्किक मन कहीं ना कहीं से बोल रहा होगा की भाई चल पहले पढ़ाई पूरा करते हैं। लेकिन हाथ है कि व्हाट्सएप से चिपका हुआ है। ये जो तर्क वितर्क कर रहा है सही गलत बता रहा है वो है आपका चेतन मन। लेकिन जिसने आपको व्हाट्सएप चलाने पर मजबूत कर दिया है वो है आपका अवचेतन मन और आज हम उसी पर बात करने जा रहे हैं। 


   स्कूल जाने वाले बच्चे को देखिएगा या अगर आप स्वयं ऑफिस जाते हैं तो देखिएगा और गौर कीजिएगा की सामान्य दिनों में आपको उठने में बड़ी परेशानी होती है। अलार्म लगाना पड़ता है फिर भी उठ नहीं पाते। फिर एक दिन आपका मीटिंग रहता है या बहुत ही जरूरी काम रहता है आपको 6 बजे उठना है। आप सोते है और अलार्म बजने से पहले ही आप एक समय से उठ जाते हैं।  या फिर एक मा को ही लीजिए एक मा अपने बच्चे के साथ सोई हुई है, बादल गरज रहा है लेकिन मा का नींद नहीं खुलता है। लेकिन तभी बच्चे का नींद खुलता है और बच्चा रोने लगता है और मा का नींद खुल जाता है। क्या आपने कभी सोचा है ये कैसे होता है ये आपका अवचेतन मन है जिसको सब पता है जो आपके सोने पर भी जगा हुआ रहता है, और उसी के कहने पर जान अनजाने में आप सभी प्रतिक्रियाएं देते है।

      अब आप जान चुके होंगे कि चेतन और अवचेतन मन क्या होता है। अवचेतन मन आपका वो मन है जो आपके will power , healing power से के कर आपके सोने , उठने, चलने, attitude सब को कंट्रोल करता है। वो हनुमान जी का अवचेतन मन ही था जिसकी ताकत को जब वो पहचान गए तो सर्वशक्तिशाली हो गए। 

आइए जाने की कोशिश करते हैं कि अपने अवचेतन मन को कैसे अपने काबू में रखे और कैसे इसकी मदद से जीवन की राह में आगे बढ़ते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त करते हुए अमीर बने।
         

                   जारी है...................

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